जांजगीर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) का काम चल रहा है। बीएलओ गांव से लेकर शहर की गलियों में वोटरों को ढूंढने के लिए खाक छान रहे हैं। इस बार एसआईआर में कई महत्वपूर्ण जानकारी दी जानी है, जिसे लेकर लोगों में असमंजस भी है। 2003 की वोटर लिस्ट में अपना या अपने पालकों का नाम खोजना भी बड़ा काम हो गया है। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि सही जानकारी ही वोटर भरे ताकि किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
छत्तीसगढ़ चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ने पत्र जारी करते हुए चेताया है कि फॉर्म में गलत जानकारी और गलत दस्तावेज देने पर एक साल की जेल और जुर्माना हो सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में सूचना जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि मृत व्यक्ति या ऐसे लोग जो अब भारतीय नागरिक नहीं रहे हैं, उनका गणना प्रपत्र जमा न करें।
आपका नाम दूसरी जगह भी ताे कटा दें एक जगह से..
इसी तरह जिनका नाम निर्वाचक नामावली में एक से अधिक स्थानों पर मौजूद है, और वह सभी जगह प्रपत्र जमा करते हैं, और गणना प्रपत्र में गलत घोषणा करते हैं तो यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है। जानकारों के अनुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31, मिथ्या जानकारी से संबंधित है। इसमें यदि कोई निर्वाचक नामावली में सम्मिलित या उसमें अपवर्जित किए जाने के बारे में घोषणा लिखित रूप से करता है जो गलत है। ऐसे मामले में 1 साल की जेल या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।





