- निचली अदालत का फैसला पलटते हुए अपर सत्र न्यायालय ने सुनाई सजा; प्राचार्य और केंद्राध्यक्ष भी दोषी करार
जांजगीर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) के 18 साल पुराने ‘पोरा बाई नकल कांड’ में न्यायपालिका ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय ने 2008 की 12वीं बोर्ड परीक्षा की प्रदेश टॉपर रही पोरा बाई, तत्कालीन केंद्राध्यक्ष फूलसाय नृसिंह, प्राचार्य एस.एल. जाटव और दीपक जाटव को दोषी पाते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
“आरोपियों ने केवल शिक्षा मंडल के साथ ही नहीं, बल्कि उन लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ भी अपराध किया है, जो दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं।”
क्या था पूरा मामला? (2008 से 2026 तक का सफर)
वर्ष 2008 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा की छात्रा पोरा बाई ने 12वीं की प्रावीण्य सूची (Merit List) में पहला स्थान हासिल किया था। लेकिन उसकी उत्तरपुस्तिकाओं में लिखावट (Handwriting) का मिलान न होने और दस्तावेजों में विसंगतियों के चलते संदेह गहराया। माध्यमिक शिक्षा मंडल की जांच में खुलासा हुआ कि पोरा बाई की जगह किसी और ने परीक्षा दी थी और पूरे तंत्र ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया था।
केस की उतार-चढ़ाव भरी टाइमलाइन:
- 2008: फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद माशिमं के उपसचिव की जांच रिपोर्ट पर 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई
- 2021 (निचली अदालत): 12 साल की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट चांपा ने सबूतों के अभाव में सभी 9 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया था।
- 2026 (अपील पर फैसला): शासन की अपील पर सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और मुख्य साजिशकर्ताओं को सजा सुनाई।
इन्हें मिली सजा, ये हुए दोषमुक्त
अदालत ने धोखाधड़ी (420), कूटरचना (467, 468), और आपराधिक षडयंत्र (120-B) की धाराओं के तहत पोरा बाई, फूलसाय नृसिंह, एस.एल. जाटव और दीपक जाटव को जेल भेज दिया है। वहीं, मामले के अन्य 5 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है।





