सक्ती// खरीफ सीजन में खाद की बिक्री में पारदर्शिता लाने और सब्सिडी का लाभ सीधे सही किसानों तक पहुंचाने के लिए एग्रीस्टेक योजना अंतर्गत किसानों के लिए “फार्मर आईडी” को अनिवार्य कर दिया गया है। अब किसानों को खरीफ सीजन में उर्वरकों का वितरण एग्रीस्टेक पोर्टल में दर्ज रकबे के आधार पर किया जाएगा। फार्मर आईडी किसान की एक डिजिटल पहचान है, जो केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयास एग्रीस्टेक के तहत तैयार की जाती है। यह आधार कार्ड की तरह ही एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसमें किसान का व्यक्तिगत विवरण, उसके बैंक खाते की जानकारी और सबसे महत्वपूर्ण उसका भू-अभिलेख (भुइया पोर्टल के अनुसार भूमि का विवरण) लिंक होता है। शासन ने किसानों को शत-प्रतिशत पहचान पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य बिचौलियों पर नियंत्रण करना, खाद की कालाबाजारी को रोकना तथा वास्तविक किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना है। जिन किसानों के पास अभी तक फार्मर आईडी नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द बनवाने के लिए कहा जा रहा है, ताकि उन्हें उर्वरक प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। किसान स्वयं एग्रीस्टेक पोर्टल में या नजदीकी सहकारी समिति या चॉइस सेंटर में जाकर अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और बी-1 (खसरा) जमा कर पंजीकरण करा सकते हैं। एग्रीस्टेक फार्मर आईडी से जुड़ी जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी एवं कृषि विभाग व राजस्व विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
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