
रायपुर
प्रदेश में इस बार धान और सब्जियों का उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है। मंत्रालय तक जिलों से पहुंची रिपोर्ट के अनुसार, 33 में से केवल बेमेतरा जिला ऐसा है जहां औसत से 40% कम बारिश हुई। इससे किसान चिंतित हैं।
बस्तर संभाग के चार जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में अधिक वर्षा हुई है, लेकिन इसके बावजूद फसलों को कम नुकसान की संभावना जताई गई है। केंद्रीय मंत्रालय की एनडीआरएफ टीम ने इन जिलों का दौरा कर रिपोर्ट केंद्र को भेज दी है।
एग्रीस्टेक पोर्टल पर होगा रजिस्ट्रेशन तभी बेच पाएंगे धान
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए केवल समितियों में ही रजिस्ट्रेशन ज़रूरी नहीं है बल्कि प्रत्येक किसान को केंद्र सरकार के एग्रीस्टेक पोर्टल पर भी पंजीयन कराना होगा, इस पोर्टल में रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर किसान धान नहीं बेच पाएंगे
डिजिटल सर्वे से धान का रकबा तय
डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत 23 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई का ऑनलाइन निर्धारण किया गया है। 20 हजार गाँवों में 2 अक्टूबर से मैन्युअल गिरदावरी के डेटा का ग्रामसभा में वाचन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, 33% या अधिक नुकसान को ही सूखा या अतिवर्षा माना जाता है। अब सूखा घोषित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। 2017 के बाद से प्रदेश में किसी क्षेत्र को सूखा घोषित नहीं किया गया है। जानकारों का कहना है कि धान की कटाई के बाद ही अंतिम रिपोर्ट आएगी, पर अब तक के कैलकुलेशन से स्पष्ट है कि प्रदेश में अच्छा उत्पादन होगा। यदि किसी क्षेत्र में विपरीत परिस्थिति बनी भी, तो राज्य और केंद्र दोनों में एक ही पार्टी की सरकार होने से राहत में कोई दिक्कत नहीं आएगी।





