छत्तीसगढ़ में शांति का टापू बनेगा शांति शिखर, 1 नवंबर को प्रधानमंत्री समाज के नाम करेंगे समर्पित

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रायपुर में बना शांति शिखर

– 2018 से 11 हजार सदस्यों ने रोज दिया न्यूनतम एक रुपये इसी से तैयार हुआ राजस्थानी शैली में शांति शिखर
– 105 फीट ऊंची, 150 फीट चौड़ी और 225 फीट लंबी है यह इमारत
– राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी रहेंगे मौजूद
रायपुर। नवा रायपुर के सेक्टर-20 में नवनिर्मित ब्रह्माकुमारी संस्थान का भव्य शांति शिखर रिट्रीट सेंटर ‘एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड’ को 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज के नाम समर्पित करेंगे।

इसके साथ ही यहां से प्रदेश स्तरीय इसके साथ ही यहां सामाजिक कल्याण और आध्यात्मिक उत्थान से जुड़े कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। नशामुक्ति अभियान, प्राकृतिक खेती-यौगिक खेती, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मूल्य व योग शिक्षा आदि कार्यक्रम चलाए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी सुबह 10 बजे शांति शिखर पहुंचेंगे और करीब 45 मिनट यहां रुकेंगे। इस दौरान मोदी कुछ समय के लिए मेडिटेशन रुम में ध्यान लगाएंगे।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी मौजूद रहेंगे। वहीं संस्थान की ओर से अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती दीदी, अतिरिक्त महासचिव डॉ. राजयोगी बीके मृत्युंजय भाई, इंदौर जोन की निदेशिका राजयोगिनी बीके हेमलता दीदी, रायपुर की संचालिका बीके सविता दीदी भाग लेंगी। ब्रह्माकुमारीज़ के रायपुर क्षेत्र की संचालिका राजयोगिनी बीके सविता दीदी ने बताया कि लगभग दो एकड़ जमीन पर बना भवन देखने में राजस्थानी शैली के महल का अहसास देता है। यह पांच मंजिला भवन हाईटेक सुविधाओं से लैस है। ब्रह्माकुमारीज़ के देश-विदेश में स्थित रिट्रीट सेंटर में यह अपनेआप में सबसे अनोखा और आकर्षक है। शांति शिखर में विशेष रूप से समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए प्रोग्राम चलाए जाएंगे।

रायपुर क्षेत्र में 50 सेवाकेंद्र और 500 उपसेवाकेंद्र संचालित
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के रायपुर यूनिट के तहत 50 सेवाकेंद्र और 500 उप सेवाकेंद्र संचालित हैं। शांति शिखर के निर्माण के लिए सभी केंद्रों में दान-कोष (भंडारी) लगाई गई थी। इसमें संस्थान से जुड़े सभी सदस्य वर्ष 2018 से हर दिन कम से कम एक रुपया का सहयोग करते रहे हैं। इस भवन के निर्माण में हर एक कार्य को बड़ी ही बारीकी और महीनता के साथ पूरा किया गया है। यहां अंदर प्रवेश करते ही दिव्य एवं शांति अनुभूति और पवित्रता के प्रकम्पन्नों को साफ महसूस किया जा सकता है।

सात साल में तैयार हुआ शांति शिखर
संस्था की तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी बीके कमला दीदी के मार्गदर्शन में 15 जनवरी 2018 को शांति शिखर की नींव रखी गई थी। वर्ष 2022 में उनके देवलोकगमन से पहले लगभग 80 प्रतिशत काम हो गया था। जमीन ठोस नहीं होने की वजह से काफी गहराई तक मिट्टी निकाल कर स्लैब ढाला गया। इसी पर भवन के सारे कॉलम खड़े किए गए। जोधपुर के कारीगरों ने सात साल में राजस्थानी शैली के इस भवन को तैयार किया है। इसके लिए 150 से अधिक ट्रकों में जोधपुर से पिंक स्टोन मंगाए गए। इंदौर जोन के पूर्व निदेशक राजयोगी ओम प्रकाश भाई का संकल्प था कि रायपुर में ब्रह्माकुमारीज़ का सबसे अनोखा रिट्रीट सेंटर बनाया जाए, जिसे शांति शिखर के रूप में आकार दिया गया।

ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा गुलाबी पत्थर से बनाई गई पहली इमारत
ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा विश्वभर में पिंक स्टोन से बनाई गई यह पहली इमारत है। छत्तीसगढ़ में प्रेस टेंसाइल बीम तकनीक से बनी यह पहली इमारत है। आमतौर पर इस तकनीक से बड़े-बड़े ब्रिज बनाए जाते हैं। 105 फीट ऊंची, 150 फीट चौड़ी और 225 फीट लंबी इस इमारत में अभी दो मंजिले और बनाई जा सकती हैं।

ये कार्यक्रम चलाए जाएंगे-
– राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक ज्ञान की नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी
– स्ट्रैस मैनेजमेंट के लिए प्रबंधन कौशल शिविर
– बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए सशक्तिकरण कार्यक्रम
– सभी समाजों और ग्रामीणों के लिए आध्यात्मिक कार्यक्रम
– मूल्यनिष्ठ शिक्षा परियोजना के तहत आवासीय ट्रेनिंग प्रोग्राम
– पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण, मृदा संरक्षण, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती, जैविक-यौगिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम
– हृदय रोग, डायबिटीज और नशामुक्ति के लिए जागरूकता कार्यक्रम

भवन में होंगी ये सुविधाएं
– 2000 लोगों की क्षमता का एलईडी स्क्रीनयुक्त एसी ऑडिटोरियम।
– 400 लोगों की क्षमता के दो सेमिनार हॉल।
– 100 लोगों को एक साथ राजयोग ध्यान करने के लिए विशाल मेडिटेशन हॉल।
– 25 लोग लाइब्रेरी में एक साथ बैठकर संस्था की आध्यात्म व नैतिक शिक्षा देने वाली किताबें पढ़ सकेंगे।
– 100 अतिथियों को ठहरने के लिए सर्व सुविधायुक्त कमरे।
– 300 से अधिक लोग एक साथ भोजन डायनिंग हॉल में कर सकेंगे भोजन
– 200 से अधिक लोग वीडियो थिएटर में संस्था द्वारा तैयार की गई आध्यात्मिक फिल्में देख सकेंगे।

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