जांजगीर।
आम लोगों को राज्य उत्सव से या ऐसे ही इसी प्रकार के सरकारी आयोजनों से अरुचि हो गई है ऐसा लगता है इन खाली कुर्सियों को देखकर..

जिला प्रशासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में शहर के कचहरी चौक में राज्य उत्सव का तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है रविवार को इस आयोजन की शुरुआत स्थानीय सांसद कमलेश जांगड़े के मुख्य आतिथ्य में की गई पर इस कार्यक्रम स्थल में दर्शकों की कमी है कुर्सियां बहुत लगाई गई है लेकिन इन कुर्सियों पर बैठने के लिए लोगों का अभाव है..
यह पहला अवसर नहीं है जब इस प्रकार की कुर्सियां खाली है इससे पहले भी जितने भी आयोजन होते हैं उन आयोजनों में लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं होती, ज्यादातर कार्यक्रमों में इसी तरह से कुर्सियां खाली रहती है पंडाल पूरा सुना रहता है..
तो क्या किस प्रकार के आयोजनों को बंद कर दिया जाए ऐसे आयोजनों से प्रशासन का समय खराब होता है और सरकार का पैसा भी बेकार जाता है इस प्रकार के आयोजनों से चुनिंदा लोग ही जुड़ते हैं जिनकी इसमें प्रत्यक्ष भागीदारी होती है..

कौन लोग जुड़ते हैं इन कार्यक्रमों से..
सबसे पहले वह सप्लायर जिसे पानी सप्लाई का काम मिलता है ऐसे ही कुछ अन्य लोग जिन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा कार्यक्रम आयोजन के लिए व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी दी जाती है..
●ऐसे कलाकार जिन्हें कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जाता है..
●ऐसे सरकारी अधिकारी कर्मचारी जिनकी ड्यूटी कार्यक्रम स्थल पर लगाई जाती है..
●जिन्हें भी कार्यक्रम के लिए बुलाया जाता है या मंची व्यवस्था दी जाती है वह सब तो मंच में सुशोभित हो जाते हैं लेकिन सामने बैठ गैलरी जो लगाई जाती है बैठने के लिए उसमें बैठने वालों की संख्या कुछ ही रह जाती है कुछ वह होते हैं जो अपने नेताओं के साथ आए रहते हैं कुछ वे लोग होते हैं जो अपने कुछ परिचित लोगों के कार्यक्रम देखने आए होते हैं इनके अलावा और किसी और को इस प्रकार के कार्यों से कोई सरोकार नहीं होता है..





