
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे, राज्य मना रहा रजत जयंती वर्ष
लेखक डॉ. कोमल शुक्ला
जांजगीर
छत्तीसगढ़ राज्य के 25 बसंत होने के साथ जांजगीर-चांपा जिला अपने 27 बसंत को पार कर चुका है। बदलते राजनीतिक समीकरण के साथ जिले के विकास की गति भी बढ़ी है मगर अभी भी वह कीर्तिमान यह जिला स्थापित नहीं कर सका है जो उसे करना था। मसलन पलायन का दंश यहां के लिए बड़ा अभिशाप है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ही कोरोना काल में यहां विभिन्न प्रदेशों से 1 लाख 13 हजार श्रमिक लौटे थे। इस तस्वीर को बदलने की जरूरत है।
25 मई 1998 को जिला बनने के बाद यहां कलेक्टोरेट, जिला अस्पताल, जिला न्यायालय, जिला पंचायत भवन सहित कई नए भवन बने हैं, वहीं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैंडलूम एंड टेक्सटाइल टेक्नालॉजी( आईआईएचटी) पालिटेक्निक, शासकीय गर्ल्स कालेज, क्रोकोडायल पार्क, कृषि महाविद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय सहित कई सौगात भी जिले को मिली है, मगर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओ की कमी अभी भी है। हालांकि अब यहां मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिल गई है और देर सबेर यह तैयार भी होगा।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी कोरोना से जंग के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आई । हालांकि अब जाकर जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे सिटी स्कैन और डायलिसिस के साथ ही सुविधाएं बढ़ी है।
अविभाजित मध्यप्रदेश से 25 मई 1998 को बिलासपुर जिले से जांजगीर-चांपा पृथक हुआ और नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया। नया जिला बनने से इसे विकास की नई दिशा मिली। वर्ष 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने से जिले की तरक्की का की रफ्तार तेज हुई। इन वर्षो में जिले ने कई उतार-चढ़ाव भी देखे और विकास की नई ऊचांईयों को छुआ। यहां नया कलेक्टोरेट कार्यालय, जिला पंचायत भवन, जिला अस्पताल का निर्माण हुआ। वहीं जिला न्यायालय सहित डभरा, जैजैपुर, पामगढ़, नवागढ़, अकलतरा और चांपा में सिविल न्यायालय की भी शुरूआत हुई। अजाक थाने के साथ कुटुम्ब न्यायालय, परिवार परामर्श केंद्र भी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पर्यटन की दृष्टि से जांजगीर, शिवरीनारायण, खरौद, चंद्रपुर और दलहा पहाड़ को नई पहचान मिली। कोटमीसोनार का क्रोकोडायल पार्क प्रदेश का एकमात्र मगरमच्छ प्रोजेक्ट है, जो वन विभाग द्वारा संचालित है। इसी तरह ऐतिहासिक धरोहरों की देखभाल के लिए जिला मुख्यालय में पुरातत्व संग्रहालय बन चुका है मगर यहां पुरातत्व संपदा का संग्रह नहीं हो सका है। चांपा में संचालित इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ हैण्डलूम टैक्नालॉजी देश का सातवां और प्रदेश का एक मात्र संस्थान है, जहां हाथकरघा प्रौद्योगिकी और टैक्सटाइल में केंद्रीय डिप्लोमा प्रदान किया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में जिले को कई सौगात मिली। जिला मुख्यालय में शासकीय गर्ल्स कालेज, कृषि महाविद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय व जनरल नर्सिंग कालेज की स्थापना तथा पामगढ़, बलौदा, नवागढ़ के बाद सारागांव और केरा में शासकीय कालेज खोला गया है। वहीं खरौद, सारागांव जांजगीर और अकलतरा में शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) संचालित है। 2014-15 शिक्षा सत्र में यहां केन्द्रीय विद्यालय की शुरूआत भी हो गई। इसके अलावा जिले का विकास पावर हब के रूप में हुआ है। यहां वर्धा पावर प्लांट नरियरा, मड़वा प्रोजेक्ट,अमझर प्लांट में उत्पादन शुरू हो गया है। इसके पूर्व से ही जिले में लाफार्ज सीमेंट कंपनी अब न्यू वोको, पीआईएल चांपा सहित अन्य औद्योगिक संस्थान संचालित हैं। जिला गठन के बाद जिले में नगरीय निकायों की संख्या बढ़ी है। अब यहां 4 नगरपालिका, 8 नगर पंचायत व 365 ग्राम पंचायतें हैं। बड़े गावों पामगढ़ और नरियरा को नगर पंचायत का दर्जा मिलने से यहां विकास की रफ्तार तेज हुई है। सारागांव, बम्हनीडीह, बाराद्वार को नये तहसील का दर्जा भी मिला है। करियर मार्गदर्शन व स्किल डेव्हलपमेंट के लिए यह माडल जिला है। सेना भर्ती के लिए रैली का आयोजन भी जिले के विकास में मिल का पत्थर साबित हुआ। यहां 300 से अधिक युवाओं का चयन सेना में हुआ है। इसी तरह कोरोना काल में यहां के अस्पतालों में बेड व वेंटिलेटर की सुविधा बढ़ी है।
राम वनगमन परिपथ का कार्य ठप
राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत शिवरीनारायण नगर में हुए विकास कार्यों से यहां की तस्वीर बदल रही थी। पहले चरण में शिवरीनारायण में 6 करोड़ की लागत से विभिन्न निर्माण कार्य हुए जिसमें शिवरीनारायण के मंदिर परिसर का उन्नयन एवं सौदर्यीकरण, दीप स्तंभ, रामायण इंटरप्रिटेशन सेन्टर एवं पर्यटक सूचना केन्द्र, मंदिर मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार, नदी घाट का विकास एवं सौंदर्यीकरण , घाट में प्रभु राम-लक्ष्मण और शबरी माता की प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार घाट में व्यू पाइंट कियोस्क, लैण्ड स्केपिंग कार्य, बाउंड्रीवाल, माड्यूलर शाप, विशाल पार्किंग एरिया और सार्वजनिक शौचालय का निर्माण भी हुआ है। मगर दूसरे चरण में 18 करोड़ का काम होना था वह सरकार बदलने के साथ रुक गया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत गांव-गांव में सड़कों का जाल बिछा है। पहुंच विहीन गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा गया है, जिससे यहां आवागमन आसान हो गया है। जांजगीर, चांपा और सक्ती बाईपास और फोरलेन का निर्माण हो गया है वहीं शिवरीनारायण से बिर्रा होते हुए चांपा तक टू लेन सड़क का निर्माण हो चुका है। पीथमपुर में हाइलेवल ब्रिज और खोखसा ओवरब्रिज का निर्माण पूरा हो गया है मगर बलौदा मार्ग पर नैला फाटक के पास ओवरब्रिज जरूरी है।
इनकी जरूरत है जिले को
जिले में इंजीनियरिंग कालेज खोले जाने, जिले के अस्पतालों में डाक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ़ की भर्ती व संसाधन की कमी दूर करने, जर्जर स्कूलों की मरम्मत, शासकीय जमीन से बेजा-कब्जा हटाने का काम प्राथमिकता से किए जाने की जरूरत है।
भ्रष्टाचार कच्ची शराब और जुआ विकास में बाधक
नगरीय निकायों से पंचायतों तथा सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, गांव गांव में कच्ची शराब की बिक्री और लोगों इसकी लत तथा जुए का फड़ विकास में बाधक है। युवा पीढ़ी इन्हीं की गिरफ्त में फंसकर तबाह हो रहे हैं और इस आग में घी डालने का काम कर रहे सूदखोर जो अनाप शनाप ब्याज दर पर उधार देकर उन्हें इन गलत कामों के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सूदखोरों पर शिकंजा भी समय की मांग है। बहरहाल जिले में बहुत से विकास कार्य हुए हैं बहुत होना बाकी है। जिले के नवनिर्माण में एक मेहनतकश मजदूर किसान के पसीने से लेकर शासकीय अधिकारी कर्मचारी ,व्यापारी, शिक्षक पत्रकार वकील विद्यार्थी और बुद्धिजीवियों की सूझबूझ की जरूरत है तब हम विकास के नए आयाम तय करेंगे। आइए उसी दिशाएं कदम बढ़ाने का संकल्प लें।





