शासन – प्रशासन के नियमों को ठेंगा दिखा रहा कन्हाईबंद कोल डिपो संचालक: ग्रामीण इसके विरोध में, कोर्ट में लंबित मामला, ग्राम पंचायत ने एनओसी नहीं दिया, फिर भी संचालक कह रहा मेरी मर्जी..!

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  • सवाल: क्या जांजगीर में नियम तोड़ने के लिए बने हैं?
  • ग्रामीण इसके विरोध में बावजूद बिना नियम का पालन किये जबरन कोल डिपो का संचालन, किसके संरक्षण में हो रहा यह खेल

जांजगीर। जिले में भले ही अन्य सभी कार्यों में शासन का नियम-कानून चलता हो, लेकिन कन्हाईबंद में कोल डिपो संचालक के सामने जिला प्रशासन के नियम-कानून कोई मायने नहीं रखते।

इसका आपको प्रत्यक्ष उदाहरण यदि देखना है तो आप नैला से लगे ग्राम कन्हाईबंद आ जाईये। यहाँ आपको बिना पंचायत एनओसी के, कोर्ट में लंबित मामला है, ग्रामीण इसके विरोध में है लेकिन फिर भी आपको कोल डिपो का मनमर्जी पूर्वक संचालन देखने को मिलेगा। आप यहाँ देखेंगे कि नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती है, कोटवारी भूमि को कब्जा कर निजी भूमि में शामिल कर लिया जाता है। कैसे बिना सड़क के डायवर्सन करने विभाग के आँखों में धूल झोंका जाता है। और ऐसा नही है कि इसकी जानकारी जिला प्रशासन को नही है । मामले की जानकारी कलेक्टर से लेकर खनिज व राजस्व अधिकारियों को है। लेकिन इसके बाद भी नियम के विपरीत कोल डिपो का संचालन होना कही न कही संचालक और प्रशासन दोनों को चर्चा में ला दिया है।

 

अब समझिए क्या है मामला

कन्हाईबंद ग्राम पंचायत द्वारा बिना अनुमति लिए मेसर्स टर्टल सर्विसेस प्रोपाइटर शशांक कुमार सिंह निवासी रामा ग्रीन सरकंडा बिलासपुर द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में खसरा नंबर 660 रकबा 0.717 हेक्टेयर में खनिज क्षमता 19 हजार एमटी, एवं 1 हजार एमटी अस्थाई अनुज्ञा पत्र के लिए मांग पत्र ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में कोल भंडारण के लिए प्राप्त हुआ था। उक्त भूमि में कोल भंडारण के लिए नीरज सिंह पिता सीताराम द्वारा अनापत्ति पत्र की मांग की गई थी। जिसे खारिज कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य जारी है। जबकि वर्तमान में मामला न्यायालय में लंबित हैं।

डायवर्सन के लिए दिया गलत शपथ पत्र…

कन्हाईबनद के ग्रामीणों का कहना है कोल डिपो संचालक नीरज सिंह द्वारा डायवर्शन के लिए गलत ढंग से अधिकारी को गुमराह करते हुए शपथ पत्र दिया गया हैं। जिसको लेकर ग्रामीणों की आपत्ति हैं। डायवर्सन में भी कई बिंदुओं पर जांच करने की आवयश्कता है।

कोल डिपो संचालन के लिए निजी जमीन के साथ कोटवारी भूमि पर भी कब्जा का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि कोल डिपो के लिए निजी जमीन तो है लेकिन इसके खरीदी में भी बड़ी गड़बड़ी हुई हैं. शासकीय भूमि के अलावा संरक्षित भूमि का भी खरीदी कर दिया गया है। यही नहीं यहाँ मौजूद कोटवारी भूमि की भी खरीदी की शिकायत हैं।

संदेह: जानकारी देने में कर रहे आनाकानी, खनिज विभाग ने गलत तरीके से दी अनुमति

ग्रामीणों का आरोप है  खनिज विभाग ने भी लेनदेन कर अनुमति दे दी होगी। अब शिकायतकर्ताओं द्वारा सूचना के अधिकार तहत खनिज विभाग से जानकारी मांगी जा रही है तो जानकारी नहीं दी जा रही हैं। खनिज विभाग को न तो मौके में जाकर निरीक्षण किया है न ही ग्रामीणों की शिकायत सुनी हैं। एकतरफा सुनवाई करते हुए कोल डिपो को खनन के लिए अनुमति दे दिया गया है। जिसको लेकर ग्रामीणों को आपत्ति है।

जिला प्रशासन से अनुमति न देने किया है शिकायत

जिला प्रशासन से शिकायत किया है कि शशांक कुमार सिंह के द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद, जनपद पंचायत नवागढ़, जिला जांजगीर-चांपा (छ०ग०) के भूमि खसरा नंबर 660/2, 660/5, 660/6, 660/7, 660/8 रकबा 0.717 हेक्टेयर भूमि में खनिज कोयला भण्डारण के लिए अनुमति न दिया जावे।

अगर उक्त भूमि पर खनिज कोयला भण्डारण की अनुमति दी जाती है तो हमारा जीवन प्रभावित होगा, पूर्व से ही कोल डिपो, एवं कोल साईडिंग संचालित है जिससे भारी वाहनों के चलने से काला धुल हमारे आसपास के क्षेत्रों प्रदूषित कर रहा है।

प्रस्तावित कोल डिपो के नजदीक भूमियों के पास तालाब है जिसमें ग्रामीण नहाते है, मवेशी पानी पीते है तथा मछली पालन भी किया जाता है। कोयला भण्डारण से पानी और भी प्रदूषित हो जायेगा। साथ ही भूमि पर आवागमन का कोई साधन नहीं है। उक्त भूमि के पास कुंआ, मंदिर, तालाब एवं सिंचाई के लिए माइनर भी है।

सीधा सवाल

सवाल:❓ ठेकेदार ने आवेदन दिया था, पंचायत ने ख़ारिज कर दिया है,क्या पंचायत ने कोल डिपो के लिए अनुमति दी है

जवाब: नहीं, कन्हाईबंद में कोल डिपो के लिए ग्राम पंचायत में संचालक द्वारा आवेदन किया था, लेकिन हमने उसे खारिज कर दिया है।

सवाल:❓ दावा किया जा रहा है कि उसे अनुमति दी गई है
जवाब: हमारे द्वारा किसी प्रकार की कोई अनुमति संचालक को नहीं दी गई है। केवल सरपंच या पंचायत नही , सभी ग्रामीण कोल डिपो खुलने के खिलाफ है।

सवाल:❓आपने कोल डिपो के खिलाफ कहां शिकायत की है
जवाब: हमने तहसील से लेकर, एसडीएम, कलेक्टर, खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग सब मे इसकी शिकायत की है। अभी मामला लंबित है, लेकिन इसके बावजूद कोल डिपो संचालक द्वारा सरकारी व कोटवारी भूमि को भी अपनी निजी भूमि में शामिल कर कार्य शुरू किया जा रहा है। अब हम न्यायालय और शासन – प्रशासन के आदेश का इंतजार कर रहे कि क्या आदेश आता है। उसके बाद पंचायत और ग्रामीण आगे की योजना बनायेंगे।

विनोद कुमार गोयल , सरपंच कन्हाई बंद

 

⇒ कलेक्टर, एसडीएम, खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग, तहसील , में किया गया है शिकायत

नि:संदेह: प्रभावित होगा ग्रामीणों का जनजीवन कोल डिपो के समीप है ग्रामीणों के घर, नहाने के लिए उपयोग होने वाले तालाब , सिंचाई नहर, फसल लगे खेत,जो आने वाले समय में प्रदूषित होंगें

:फोटो के माध्यम से समझिए कन्हाईबंद में किस स्थान पर बिना अनुमति कोल डिपो संचालित करने कर ली गई है पूरी तैयारी..

इस मामले में एसडीएम सुभ्रत प्रधान व खनिज अधिकारी अनिल साहू को संपर्क किया गया, संपर्क लेकिन नही हो पाया। संपर्क होते ही जानकारी अपडेट कर दिया जाएगा।

 

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