
*कार्य के दौरान रेलवे ने इस खंड के कई अन्य स्टेशनों पर पूरे किए संरक्षा के कई महत्वपूर्ण कार्य*
बेहतर योजना व प्रबंधन के साथ यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुये बिना यात्री गाड़ियों को प्रभावित किए सम्पन्न हुये ये सभी कार्य
बिलासपुर :-
यात्रियों को संरक्षित, सुगम एवं समयबद्ध रेल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए अधोसंरचना विकास के कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हावड़ा–मुंबई मुख्य लाइन पर स्थित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर–झारसुगुड़ा सेक्शन में चौथी लाइन निर्माण का कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। इस क्रम में अकलतरा स्टेशन में यार्ड रिमाडलिंग एवं चौथी लाइन कनेक्टिविटी का कार्य सफलता पूर्वक सम्पन्न किया गया है।
इसके अलावा इस कार्य के दौरान संरक्षा से संबन्धित अनेक ऐसे कार्य भी पूरे किए गए जिन्हें सामान्यतः ब्लॉक लेकर और गाड़ियों को रद्द करके ही पूरा किया जा सकता है। इस दौरान यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया और सभी कार्य बिना किसी अतिरिक्त गाड़ी को प्रभावित किए सम्पन्न किए गए। यह कार्य रेलवे के बेहतर योजना और प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
*इस कार्य के दौरान इस रेलखंड के अन्य स्टेशनों में संपादित किए गए संरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य इस प्रकार है :*
👉 राबर्टसन-खरसिया स्टेशनों के मध्य स्थित समपार संख्या 311 में 02 नं RH गर्डरों की डी-लॉन्चिंग की गई |
👉 सक्ति -बाराद्वार स्टेशनों के मध्य स्थित समपार संख्या 324 में 02 नं RH गर्डरों की लॉन्चिंग की गई |
👉 अकलतरा स्टेशन में 01 नं फुट ओवरब्रिज की लॉन्चिंग की गई |
👉 03 नं एसईजे (SEJ) डिस्मेंटलिंग किया गया
👉 02 नं एसईजे इंसर्शन किया गया |
👉 08 नं टीटीआर (TTR) थीक वेब स्विच लगाया गया |
👉 01 नं डब्ल्यूसीएमएस क्रॉसिंग इंसर्शन का कार्य किया गया |
👉 27 ग्लू जॉइंट्स का नवीनीकरण किया गया।
👉 रेल लाइन पर 60 AT वेल्ड्स किए गए।
👉 लगभग 394.89 मीटर रेल नवीनीकरण का कार्य किया गया।
👉 51 ग्लू जॉइंट्स का नवीनीकरण किया गया।
👉 30.40 मीटर लीड रेल नवीनीकरण का कार्य किया गया |
इन सभी कार्यों से यार्ड की क्षमता, ट्रैक की मजबूती एवं स्थायित्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भविष्य में परिचालन और अधिक निर्बाध, संरक्षित एवं समयबद्ध होगा । यात्रियों को बेहतर सुविधा के साथ–साथ माल परिवहन की गति में भी वृद्धि होगी। इससे क्षेत्रीय व्यापार, उद्योग और परिवहन को नए अवसर मिलेंगे और सामाजिक–आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।





