- आरोपी को सजा दिलाने DNA टेस्ट प्रिजर्व रखने का भी आदेश दिया गया
- सुनवाई में हाईकोर्ट बोला- पीड़िता को भविष्य तय करने का मिले अधिकार
दरअसल, रायपुर जिले की एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को प्यार में फंसाकर आरोपी युवक ने शादी करने का झांसा दिया। फिर उसके साथ रेप किया। लड़की के परिजनों को तब संदेह हुआ जब बच्ची के पेट का आकार बढ़ने लगा।पूछताछ पर नाबालिग ने पूरी घटना की जानकारी दी। जिसके बाद परेशान परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां जांच के बाद पता चला कि किशोरी 25 सप्ताह (6 महीने) की गर्भवती है।
रिपोर्ट में स्पष्ट, गर्भपात से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय जोखिम नहीं
पीड़ित लड़की ने अपने परिजन के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात कराने के लिए अनुमति देने की मांग करते हुए याचिका लगाई। कोर्ट ने 19 दिसंबर को बीआर अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी कर मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अवकाश के दिन खुला हाईकोर्ट
मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए शीतकालीन अवकाश के बावजूद सोमवार को विशेष कोर्ट गठित कर इस मामले की सुनवाई की गई। जस्टिस पी.पी. साहू ने याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, दुष्कर्म पीड़िता को यह आजादी और अधिकार मिलना चाहिए कि वह स्वयं तय करे कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या उसे समाप्त करना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की गर्भपात की अनुमति मांगने वाली याचिका स्वीकार की जाती है।





