- प्रधानमंत्री ने देशभर के डीजीपी को दिया पुलिसिंग का मंत्र, कहा- स्मार्ट पुलिसिंग ही भविष्य..
60 वीं डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन 2047 की पुलिसिंग का रोडमैप तैयार किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने पुलिस अधिकारियों को आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी 21 साल में अपराध, तकनीक और सुरक्षा की नई चुनौतियों को देखते हुए पुलिस प्रणाली में बदलाव की जरूरत है।
उन्होंने महिला अपराध विषय पर चर्चा के समय कहा कि जिस तरह पुलिस ने डायल-112 नंबर पूरे देश में चल रहा है, वैसा ही महिला अपराध रोकने के लिए एक इमरजेंसी नंबर जारी किया जाए। या एक ऐसा सिस्टम बने जिसमें पूरे देश की पुलिस एक साथ जुड़े।
चर्चा के दौरान थानों को टेक्नोलॉजी आधारित और स्मार्ट पुलिसिंग के अनुरूप अपग्रेड करने पर जोर दिया। परंपरागत अपराध को रोकने के लिए पुलिस अपराधियों से एक कदम आगे सोचे। पीएम ने फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में बड़े अवसरों का उल्लेख करते हुए अधिक रिसर्च और व्यावहारिक उपयोग पर बल दिया।
साइबर अपराधियों को रोकने के लिए पुलिस भी तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करे। कुछ विदेशी फारेंसिक एक्सपर्ट ने भी प्रेजेंटेशन दिया कि किस तरह तकनीकी का उपयोग कर अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है।

आज इन मुद्दों पर होगी चर्चा..
- उभरती चुनौतियां: पुलिसिंग में एआई का उपयाेग।
- भू-राजनीतिक चुनौतियां: विदेशी हस्तक्षेप एवं उसकी काउंटर रणनीतियां।
- भू-राजनीतिक चुनौतियां: रा (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग)। इसमें पड़ोस में भारत की चुनौतियां।
- बाह्य खतरे: बदलते हुए सुरक्षा परिदृश्य पर बात होगी।
- अवार्ड: खुफिया ब्यूरो अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक दिया जाएगा। देश में शहरी पुलिसिंग के तीन सर्वश्रेष्ठ शहरों को पुरस्कृत किया जाएगा।
- छात्रों से भेंट: शाम 4 बजे एम-1 में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं से मिलेंगे। 30 छात्राओं को पीएम से मिलने के लिए बुलाया गया है। उनसे पढाई के साथ करियर को लेकर चर्चा की जाएगी।
- अब छोटे अपराधों में भी होगी फोरेंसिक जांच..
देश में डीपफेक और साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एआई के दौर में नए-नए तरह के क्राइम सामने आ रहे हैं। डीपफेक जिसमें एआई-जनरेटेड फर्जी वीडियो, ऑडियो या इमेज का उपयोग अपराधी कर रहे हैं। आज की डिजिटल दुनिया में एक गंभीर खतरा बन चुका है। डीजी कांफ्रेंस में इस मुद्दे पर करीब दो घंटे तक चर्चा चली। जिसमें यह तय हुआ कि आने वाले समय में हमें डीपफेक को तोड़ना है। इसके पीछे छुपे अपराधियों को पकड़कर सामने लाना है।
- 7 साल से अधिक सजा वाले जुर्म में फोरेंसिक जांच जरूरी..

पिछले साल तीन नए कानून अस्तित्व में आए हैं। पहली बार भारतीय साक्ष्य अधिनियम बनाया गया है। जिसमें सभी अपराधों में साक्ष्य को अधिक फोकस करने पर जोर दिया गया है।
इसके अनुसार ऐसे सभी अपराध जिसमें 7 साल या उससे अधिक सजा का प्रावधान है, जैसे बलात्कार, मर्डर, उसकी फोरेंसिक जांच अनिवार्य रूप से होगी। फोरेंसिक विशेषज्ञ साक्ष्य एकत्र करने के लिए अपराध स्थल पर जाएंगे। सबूतों से छेड़छाड़ को रोकने के लिए वीडियोग्राफी को भी अनिवार्य किया गया है।
- विदेश से भगोड़ों को लाने पर चर्चा, इनमें छत्तीसगढ़ का सौरभ भी..
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन विदेश में छिपे भारतीय भगोड़ों को वापस लाने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें कई बड़े नामों का उल्लेख किया गया। फिलहाल भारत की 47 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि और 11 देशों के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्था (एग्रीमेंट) है। इस प्रक्रिया का नोडल विभाग गृह मंत्रालय है।
केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों की पुलिस को भगोड़ों की वापसी के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए। चर्चा में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के चार भगोड़े ऐसे हैं जिनके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इनमें महादेव सट्टा एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, शुभम सोनी और शराब घोटाले का फरार आरोपी विकास अग्रवाल उर्फ सिब्बू शामिल है। चारों के दुबई में छिपे होने की चर्चाएं हैं।





