जनजातियों को समझने उनके पास जाना जरूरी: डॉ खैरवार..

InShot_20260126_232501929
InShot_20260126_080040157
No Slide Found In Slider.
  • जनजाति समाज के गौरवशाली अतीत पर कार्यशाला..

जांजगीर । शासकीय टीसीएल महाविद्यालय में “जनजाति समाज के गौरवशाली अतीत : ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि डॉ. एचपी. खैरवार ने कहा कि भारतीय जनजातीय समाज को समझने के लिए हमें उनके बीच जाना होगा। इतिहास केवल शौर्य और संघर्ष नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन का भी दस्तावेज है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. डीआर. लहरे ने कहा कि जनजातीय समाज का आध्यात्मिक पक्ष अत्यंत समृद्ध है, जिसमें प्रकृति को देवतुल्य मानने की परंपरा, सह-अस्तित्व की भावना और सामूहिक निर्णय की संस्कृति शामिल है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों का दायित्व है कि वे जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और प्रसार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
विशिष्ट अतिथि मिथलेश कुजूर ने जनजाति समाज की सादगी, परिश्रम और सामाजिक एकजुटता का उल्लेख करते हुए बताया कि आधुनिक समय में भी जनजातीय मूल्य समाज को नई दिशा दे सकते हैं।

जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक जेवियर टोप्पो ने कहा कि जनजातीय समाज की पारंपरिक कलाएं, हस्तशिल्प, वनोपज आधारित ज्ञान और उद्यमशीलता आज के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।उद्योग अधिकारी चैन कंवर ने कहा कि जनजातीय समुदायों की कार्यकुशलता और प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनके संतुलित उपयोग का मॉडल सतत विकास के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराएं भारत की सभ्यता को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। डा एमआर बंजारे ने कहा कि जनजातीय समुदायों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सामुदायिक जीवन और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है, जिसे आज की पीढ़ी को समझकर अपनाने की आवश्यकता है।

इसके पूर्व कार्यकम के संयोजक प्रो आर एस भगत ने कहा कि समाज के लोगों को अपनी कला, संस्कृति और नैतिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने एकजुट होने की जरूरत है। जनजाति समाज केवल ड्राईंगरूम में प्रदर्शनी की वस्तु न बनें बल्कि हक अधिकार के लिए संगठित हों। जल जंगल जमीन बचाने वाले जनजातियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन डॉ कोमल शुक्ला ने व आभार प्रदर्शन डा. माधुरी मिंज ने किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और प्राध्यापक उपस्थित थे।

Latest

सिकल सेल की दी गई जानकारी

जांजगीर। जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय टीसीएल स्नातकोत्तर महाविद्यालय जांजगीर में सी कॉस्ट के प्रयोजन में प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा sickle cell anemia and use...
Janjgir - Champa
0
minutes

कोसला में बनेगा महतारी सदन और हायर सेकंडरी स्कूल के लिए...

कोसला गांव के चौपाल में दिखी मुख्यमंत्री की सादगी और संवेदनशीलता *पीपल के पेड़ तले खाट पर बैठकर ग्रामीणों से किया सीधा संवाद: समस्याएं सुनीं...
Bhilai
0
minutes

CM साय और वित्त मंत्री OP चौधरी पहुंचे कोसला, माता कौशल्या...

*माता कौशल्या मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की* रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत...
Bhilai
0
minutes

कलेक्टर पहुंचे उन्नतिशील किसान के खेत, नवाचार अपनाने किसानों को किया...

*पारंपरिक खेती छोड़ वैकल्पिक फसलों से दोगुनी-तीन गुनी आय, कलेक्टर ने की सराहना* *आम, खीरा, लौकी, कटहल, नींबू, एप्पल बेर, काली मिर्च,...
Business
0
minutes