- जिला उपभोक्ता आयोग का निर्णय, वाद व्यय बीस हजार रूपए भी देना होगा।
जांजगीर। बीमा अवधि में बिमित व्यक्ति की मौत होने के बाद भी बीमा कंपनी द्वारा डेथ क्लेम देने से इनकार कर दिया थाl पीड़ित ने मामले की शिकायत जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की थीl सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दोषी पाया और 20 लाख रुपये देने का आदेश पारित किया है, साथ ही 20 हज़ार रुपये वाद व्यय भी देना होगा l
जिला उपभोक्ता आयोग से मिली जानकारी के अनुसार
उपभोक्ता खीर बाई पटेल की मॉ हेमबाई पटेल ने अपने जीवन काल में टर्म लाइफ़ कवर बीमा पॉलिसी से आई सी आई सी आई प्रूडेंशियल लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनी से लिया था, जिसमें परिवादीनी नॉमिनी थी । जो एक वर्ष के लिए थी तथा उसका वार्षिक प्रीमियम 3,517/- हेमबाई पटेल ने अदा किया था । पॉलिसीधारक हेमबाई की मृत्यु बीमा अवधि में दिनांक 21/04/21 को सामान्य परिस्थितियों में घर में हो गई।
उसके बाद नॉमिनी की हैसियत से उपभोक्ता/शिकायतकर्ता बीमा धन लेने हेतु क्लेम फार्म सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित जमा किया लेकिन बीमा कंपनी ने इस आधार पर की पॉलिसीधारक पॉलिसी ज्वाइन करने के पूर्व से ही कैंसर रोग से ग्रसित थी और उसके बारे में पालिसी लेते समय नहीं बताया गया है के आधार पर दिनॉक 18/05/2022 को बीमा दवा अस्वीकार कर दिया । तब उपभोक्ता/शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर चांपा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया ।
जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर-चांपा के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू , सदस्य विशाल तिवारी , सदस्य महिमा सिंह ने दोनों पक्षों के द्वारा पेश शपथ पत्र, दस्तावेजों व तर्कों का सावधानी पूर्वक अवलोकन कर पाया कि बीमा धारक ने कोई ग़लत जानकारी नहीं दी थी । बीमा कंपनी यह प्रमाणित करने में असफल रहे कि मृतका बीमा धारक बीमा लेने के पूर्व किसी गंभीर बीमारी या कैंसर से ग्रसित थी ।
इस प्रकार जिला आयोग के द्वारा यह पाया कि बीमा कंपनी ने बिना किसी उचित कारण के बीमा राशि देने से इंकार कर सेवा में कमी व अनुचित व्यापारिक व्यवहार किया है ।
अतः बीमा कंपनी उपभोक्ता / शिकायतकर्ता को बीमा राशि 20,00,000/- ( बीस लाख रुपये ) , वाद व्यय 20,000/- (बीस हजार रूपए ) आदेश दिनांक से 45 दिनों के भीतर अदा करेगी । नियत अवधि में आदेशित राशि नहीं देने पर आदेश दिनांक से भुगतान दिनांक तक आदेशित राशि पर 7% वार्षिक ब्याज भी देगी । उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के अंतर्गत पेश परिवाद / शिकायत को स्वीकार कर उक्त आदेश पारित किया गया ।





