
- ऐसे जगमग होगी रोशनी
जांजगीर। दीपावली इस बार छह दिनों तक मनाई जाएगी, जिसकी शुरुआत 18 अक्टूबर को धनतेरस से हो गई। इस दौरान हनुमान जन्मोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज जैसे पर्व मनाए जाएंगे। हर दिन ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बनेगा, जिससे पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा। इस बार 20 अक्टूबर को उदया तिथि में अमावस्या नहीं है फ़िर भी सोमवार को ही दिवाली मनेगी क्योंकि यह रात में मनाया जाने वाला पर्व है
यम-नियम से दीपदान, उपासना से लक्ष्मी की कृपा बरसेगी
धनतेरस, हनुमान जन्मोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा व भइया दूज जैसे पर्व लगातार मनाए जाएंगे। हर दिन ग्रह-नक्षत्रों का अद्भुत संयोग बनने से पर्व का महत्व बढ़ गया है। यम-नियम से दीपदान व देव उपासना करने वाले साधकों के ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी
स्नानदान अमावस्या 21, गोवर्धन पूजा 22 को
समुद्र मंथन में जिस कलश के साथ भगवती लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। धनतेरस पर उसके प्रतीक स्वरूप धन, ऐश्वर्य वृद्धि की कामना से सोना, चांदी, बर्तन, वाहन, भौतिक सुख साधना की खरीदारी करना चाहिए। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती थी, लेकिन अबकी अमावस्या दीपावली के अगले दिन भी रहेगी। इसके चलते 21 अक्टूबर को स्नान-दान श्राद्ध की अमावस्या रहेगी। महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी इसी दिन मनाया जाएगा, जबकि गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को होगी।
कब क्या मनाया जाएगा
20 को मनाई जाएगी दिवाली दोपहर 2:57 बजे से शुरू होगी अमावस्या
-20 अक्टूबर की दोपहर 2.56 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। कार्तिक कृष्णपक्ष की अमावस्या दोपहर 2.57 बजे से लगेगी। सुबह स्नान के बाद हनुमत दर्शन करें। शाम 2.34 बजे 4..05 बजे तक कुंभ की स्थिर लग्न रहेगी। इसके बाद 7.10 से रात 9.06 बजे तक वृष की स्थिर लग्न में इसमें पूजन करना पुण्यकारी रहेगा।
–21 अक्टूबर को स्नान-दान श्राद्ध की अमावस्या रहेगी। महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस।
-22 अक्टूबर को कार्तिक शुक्लपक्ष की प्रतिप्रदा तिथि शाम 6.18 बजे तक रहेगी। उक्त तारीख को गोवर्धन पूजा की जाएगी। गाय के गोबर का पर्वत बनाकर उसका पूजन करने से धन, वैभव व लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
-23 अक्टूबर को कार्तिक शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि पर भैया दूज का पर्व मनाया जाएगा। बहनें भाई की बलाएं लेकर उनकी चिरायु की कामना करेंगी। यमराज के दूत चित्रगुप्त व कलम-दवात का पूजन इसी दिन किया जाएगा।





