जांजगीर-चांपा |
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट शिवरीनारायण–राहौद–खरौद इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और विवाद का केंद्र बनी हुई है। महिला चिकित्सक एवं महिला सह-चिकित्साकर्मियों ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न और असुरक्षा को लेकर जिला कलेक्टर एवं सचिव, अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी को लिखित शिकायत सौंपी, लेकिन शिकायत के बाद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए।

महिला कर्मचारियों का आरोप है कि यूनिट में पदस्थ एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर अनुज कश्यप द्वारा लंबे समय से अमर्यादित भाषा, अश्लील टिप्पणियां, मां-बहन की गाली-गलौज, धमकी तथा मानसिक उत्पीड़न जैसा व्यवहार किया जा रहा है। महिलाओं के अनुसार, इस कारण कार्यस्थल पर भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
शिकायत का नतीजा—आरोपित पर नहीं, शिकायतकर्ता पर कार्रवाई
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महिला चिकित्सकों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद नामजद अधिकारी पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उल्टा शिकायत करने वाली डॉक्टर को ही जांच पूर्ण होने तक 48 घंटे के लिए सस्पेंड कर दिया गया।
महिला कर्मचारियों का कहना है कि 48 घंटे की समय-सीमा पूरी होने के बावजूद अब तक बहाली नहीं की गई, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या शिकायत करना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया है।
6 दिन से बंद पड़ी मोबाइल मेडिकल यूनिट
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। महिला चिकित्सक एवं सह-चिकित्साकर्मियों के अनुसार, एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर के कामकाज और व्यवहार से तंग आकर कोई भी चिकित्सक यूनिट में चिकित्सा कार्य करने को तैयार नहीं है।
परिणामस्वरूप पिछले 6 दिनों से मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरी तरह बंद पड़ी हुई है।
स्लम क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बच्चे, जो इस योजना पर निर्भर हैं, स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो गए हैं। सवाल यह है कि जब योजना धरातल पर ठप पड़ी है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
कंपनी प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल
यहां सबसे बड़ा सवाल मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन कर रही कंपनी के प्रबंधन पर भी उठता है।
महिला कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार मौखिक और लिखित रूप से प्रबंधन को स्थिति से अवगत कराया, लेकिन प्रबंधन ने न तो कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की और न ही हालात को संभालने की कोई ठोस पहल की।
क्या कंपनी प्रबंधन महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है?
क्या शिकायतों को दबाने और असहज सवालों से बचने की कोशिश की जा रही है?
और क्या कंपनी प्रबंधन प्रशासनिक संरक्षण के भरोसे सब कुछ नजरअंदाज कर रहा है?
अधिकारी मीडिया से क्यों बच रहे हैं?
मामले पर जब मीडिया ने जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पक्ष से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, तो बार-बार कॉल करने के बावजूद फोन नहीं उठाए गए।
इससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि कहीं यह चुप्पी जानबूझकर तो नहीं साधी जा रही।
राजनीतिक नजदीकी की धौंस
सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर स्वयं को एक मंत्री का करीबी बताकर धौंस दिखाने की बात कही जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इसी कथित नजदीकी के कारण न तो प्रशासन सख्त कदम उठा पा रहा है और न ही कंपनी प्रबंधन कोई ठोस निर्णय ले रहा है।
जनता पूछ रही है—न्याय मिलेगा या ढाक के तीन पात?
महिला चिकित्सक एवं सह-चिकित्साकर्मियों का कहना है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच, बहाली और सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई, तो यह मामला केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेगा।
- पढ़िए शिकायत में क्या लिखा है






