● कब तक चुप बैठें अब तो कुछ है बोलना.
● एक दूसरे से करते हैं प्यार हम.
● अपना ही साया देख के तुम जाने जहाँ शर्मा गई.
..जैसे गीतों पर बनाया रील..
⇒ जम के वायरल हो रहा अधिकारियों का रील..
शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ में सामने आया है, जिसमें कुल उत्सव 8 नवम्बर को रील उत्सव के रूप में मनाया गया।
रायगढ़ । कांग्रेस शासनकाल में सन 2020 में शहीद नंद कुमार पटेल के नाम पर अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय बिलासपुर से पृथक कर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय की स्थापना रायगढ़ में की गई। जिसमें वर्तमान में जिला रायगढ़, सारंगढ़, शक्ति व जांजगीर को मिलाकर लगभग 140 कॉलेज शामिल हैं। विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से ही विश्वविद्यालय के कुलपति जो कि वर्तमान में भी कुलपति हैं के द्वारा शहीद नंदकुमार पटेल को विश्वविद्यालय का कुल पुरुष व उनके जन्मदिन 8 नवंबर को कुल उत्सव के रूप में मनाने का की घोषणा की थी। कांग्रेस शासन काल में कुलपति के द्वारा बाकायदा पत्र प्रेषित करके प्रत्येक महाविद्यालय में कुल उत्सव मना कर ग्रुप में फोटो पोस्ट करने हेतु दबाव डाला जाता रहा है। इसी तारतम्य में विश्वविद्यालय का प्रथम और द्वितीय कुल उत्सव जब कांग्रेस का शासन काल था धूमधाम से रायगढ़ के ऑडिटोरियम में मनाया गया, परंतु जैसे ही प्रदेश में भाजपा की सरकार आई या कुल उत्सव विश्वविद्यालय के एक कोने में ही सिमट कर रह गया।
इस वर्ष का कुल उत्सव विश्वविद्यालय परिसर में मनाया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख अधिकारीगण कुल उत्सव को छोड़कर रील बनाने में ही व्यस्त रहे। मजे की बात तो यह है कि वे रील बनाने में इतने व्यस्त थे कि इन्होंने जिस कमरे में कुल उत्सव मनाया जाना था वहां मां सरस्वती और शहीद नंदकुमार पटेल जी के छायाचित्र के सामने भी रील बना डाली। विश्वविद्यालय के इन अधिकारियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कर्मचारी भी इस कृत्य में शामिल हो गए। सुबह से ही विश्वविद्यालय में केवल फोटो सेशन और रीलबाजी का कार्यक्रम चला रहा था ।
कुल उत्सव कब शुरू हुआ और कब खत्म हुआ इसका किसी को ध्यान भी नहीं रहा।
विश्वविद्यालय के कुलपति भी इन चीजों को नजर अंदाज करते रहे। विश्वविद्यालय की वर्तमान कुल सचिव , कुल उत्सव की प्रमुख व संयोजक , विश्वविद्यालय के अन्य प्रमुख अधिकारी तथा विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों ने रील को इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप स्टेटस और डी पी पर जमकर वायरल किया। कल उत्सव प्रारंभ होने के पूर्व ही यह कारनामा सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था और जन समुदाय में इसकी चर्चा सरेआम थी। क्षेत्र की शिक्षाविदों की राय जाने तो उन्होंने शिक्षा संस्थान के इस उच्च मानक संस्था के अधिकारियों के द्वारा शासकीय कार्यालय में एक प्रमुख आयोजन के दिन ऐसा किया जाना सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन बताया है वहीं दूसरी ओर कुछ जनप्रतिनिधियों ने दबी जुबान से इसे शहीद नंदकुमार पटेल का घोर अपमान करना माना है। वास्तविकता तो यह है की प्रदेश में भाजपा सरकार आ जाने के बाद विश्वविद्यालय की स्थिति बद से बदतर है। जब शहीद नंदकुमार पटेल के सुपुत्र उमेश पटेल जी स्वयं उच्च शिक्षा मंत्री थे तो उन्होंने भी इस विश्वविद्यालय के लिए कोई प्रयास नहीं किया और इसलिए यह संस्थान केवल एक परीक्षा केंद्र बनकर रह गया है। विश्वविद्यालय अपनी स्थापना से लेकर ही आज तक विवादों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्वविद्यालय के किसी मापदंड पर यह पूर्ण नहीं है। ना यहां शोध की गतिविधियां है, ना ही यहां कोई अकादमी कार्य है बस यहां रील बनाने का प्रशिक्षण जरूर दिया जा रहा है।
सरकारें बदल जाने से किसी महान व्यक्ति का कद नहीं गिर जाता और न ही किसी शैक्षणिक संस्थान को मनमानी करने की आजादी मिल जाती है।
जानकारों के अनुसार सरकारी आयोजन में इस तरह रील बनाना सिविल सेवा आचार संहिता का उल्लंघन है. कानून के जानकारों के अनुसार जिस समय रील बनाया गया वह समय कार्यालयिन समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे का समय था ऐसे समय में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों के विद्यार्थी और प्राध्यापक काम से आते हैं ऐसे समय में रील बनाना सिविल सेवा संहिता का उल्लंघन है
शिक्षा के सर्वोच्च मंदिर इस तरह रील बनाने वाले इन अधिकारियों पर सरकार क्या और कितना कार्यवाही करती है यह तो समय ही बता पाएगा..





