
- हादसा या साजिश नहीं हो सका खुलासा, सीडीआर की रिपोर्ट भी अब तक नहीं आई…
जांजगीर। जिला अस्पताल जांजगीर के सीएस कार्यालय के गोपनीय दस्तावेजों से भरे एक कक्ष में 11 मई 2025 को आग लग गई थी, आगजनी में जिला अस्पताल के सरकारी रिकार्ड जल गए थे, इसलिए घटना के बाद थाना में रिपोर्ट लिखाई गई थी, कुछ कर्मचारियों को स्थानीय अस्पताल प्रबंधन द्वारा इधर उधर किया गया था, लेकिन छह माह बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। आगजनी की घटना हादसा थी या किसी का साजिश यह जांच के कफन के नीचे दफन हो चुका है। न तो अस्पताल के जिम्मेदार आगजनी की घटना तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं न ही पुलिस इस मामले में जांच के बाद किसी नतीजे पर पहुंचने में दिलचस्पी ले रही है।
जिला अस्पताल के सीएस डॉ. अनिल जगत के ट्रांसफर के बाद नए सीएस के पद पर डॉ. दीपक जायसवाल को पदस्थ किया गया था। उनका स्टाफ से समन्वय नहीं होने के कारण डॉक्टरों ने उनका विरोध किया था। न केवल डॉक्टर बल्कि पूरा अस्पताल के कर्मचारियों ने विरोध किया तो दबाव में सरकार को सीएस का ट्रांसफर करना। सूत्रों के अनुसार उनके कार्यकाल के दौरान जेडीएस में कुछ भर्तियां हुई थी और कुछ खरीदी व अन्य कार्य कराए गए थे। मामला विधायक व्यास नारायण कश्यप ने विधान सभा में भी उठाया था। इसके बाद सरकार दबाव में आई और सीएस का ट्रांसफर सारंगढ़ कर दिया गया। उनके ट्रांसफर के बाद 11 मई की रात अचानक सीएस कार्यालय के उसी कक्ष में आग लग गई जहां गोपनीय दस्तावेज रखे गए थे। जिस रात आग लगी उस रात ड्यूटी पर तत्कालीन सीएस और वर्तमान अस्पताल कंसल्टेंट के खास जेडीएस कर्मचारी विजेंद्र पाॅल की नाइट ड्यूटी थी। इस घटना के बाद विजेंद्र पॉल को जिला अस्पताल से हटाकर बीडीएम चांपा भेज दिया गया है।
अस्पताल सलाहकार के खिलाफ भी हुई थी शिकायत
जिला अस्पताल के अधिकारियों पर जीवन दीप समिति में भर्ती प्रक्रिया और फंड के इस्तेमाल में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने 2 अप्रैल को अस्पताल सलाहकार अंकित ताम्रकार के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को दी गई थी। अब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है।
जांच पर उठ रहे सवाल..
जिला अस्पताल में लगी आग के मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। घटना के बाद बिजली विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। एफएसएल की टीम ने भी वहां से सैंपल लिए हैं। इसके बाद तत्कालीन टीआई प्रवीण द्विवेदी द्वारा अस्पताल में काम करने वालों की जानकारी लेने के लिए सभी के मोबाइल नंबर लिए गए थे। सीडीआर की जांच से पता चल सकता कि आखिरकार घटना के समय मौके पर या आसपास किस कर्मचारी का लोकेशन था, लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच की पूरी प्रक्रिया ही रूक गई है। जिसके कारण आगजनी के जिन्न का भूत बाहर नहीं निकल पाया है। इससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
एसपी बोले इसके बारे में पता करते हैं…
JANJGIRJUNCTION.COM ने आगजनी का कारण करीब छह माह बाद भी सामने नहीं आने व जांच पूरी नहीं होने के संबंध में जांजगीर–चांपा के एसपी विजय कुमार पांडेय से बात की। उन्होंने जांच को प्रभावित करने के किसी भी प्रकार की संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा कि अब तक आगजनी मामले में कितनी प्रगति हुई है, सीडीआर की रिपोर्ट आई की नहीं उसके बारे में पता करेंगे।





