रायगढ़। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा “ज्ञान भारतम्” के रूप में एक महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजना का शुभारंभ किया गया है। इस योजना का उद्देश्य देशभर के विद्यालयों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों (हस्तलिखित ग्रंथों) का व्यवस्थित अन्वेषण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कर उन्हें व्यापक रूप से जनसुलभ बनाना है।
“ज्ञान भारतम्” पहल न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय ज्ञान परंपरा के अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रूप से पहुँचाने का भी सशक्त माध्यम बनेगी।
इसी क्रम में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में के नेतृत्व मे जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, पांडुलिपियों के सर्वेक्षण एवं संबंधित कार्यों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान और संरक्षण का कार्य तेजी से किया जा सके।
जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यदि किसी व्यक्ति, संस्था या परिवार के पास प्राचीन पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं, तो उनकी जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि उनके संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
“ज्ञान भारतम्” अभियान जनसहभागिता से ही सफल हो सकेगा। यह केवल एक शासकीय योजना नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने का सामूहिक दायित्व है।
जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों, शिक्षण संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों से इस पहल में बढ़-चढ़कर सहयोग करने का आग्रह किया है, ताकि रायगढ़ जिला भी इस राष्ट्रीय अभियान में अग्रणी भूमिका निभा सके।



