- एसपी ने मामले की साइबर से जाँच कराई, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई
जांजगीर। पुलिस की छवि आम जनमानस के बीच जनसुरक्षा और जनहित के रूप में बेहद सम्मान पूर्वक देखा जाता है। लेकिन तब क्या हो जब जनता के सुरक्षा के लिए लगी पुलिस को देखकर ही लोग खुद को असहज और असुरक्षित महसूस करने लगे।
हम बात कर रहे दिसम्बर में हुई अवैध वसूली वाले उस घटना की, तिलई के तीन युवकों की जो 28 दिसम्बर को जांजगीर – बनारी के बीच तीन वर्दीधारी कथित पुलिस आरक्षकों के अवैध वसूली का शिकार हो गए। युवको ने 28 दिसम्बर को आरक्षक के मोबाइल से दिखाए यूपीआई में दोपहर 12 बजकर 50 मिनट में 2500 रुपये भेजा।
आपको बता दें 28 दिसम्बर की दोपहर यह घटना हुई। जांजगीर के पास इन तीन युवकों को आरक्षकों न सिर्फ धमकाया बल्कि, पैसे देने जबरन दबाव बनाया, नही तो जेल भेजने की धमकी दी।
जेल की धमकी सुन युवक डरकर सहम गए, और आरक्षकों से छोड़ने की अर्जी-विनती करने लगे। जिसके बाद आरक्षकों ने युवको के जेब की तलाशी ली तब युवको के पैसे नहीं थे। जिसके बाद घर से या किसी परिचित से पैसा मंगाकर देने दबाव बनाया ।
खुद पर कार्रवाई होने और जेल जाने के डर से युवको ने परिचितों से मदद मांगी और 2500 रुपये अपने फोन पे में लेकर आरक्षक के मोबाइल में दिखाए यूपीआई में भेजा तब जाकर आरक्षकों ने उन्हें जाने दिया।
इस घटना को Janjgirjunction.com ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने अपने संज्ञान में लेकर मामले की जांच की जिम्मेदारी साइबर सेल प्रभारी को दिया था।
विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि साइबर ने युवको के लिए पैसे वाली यूपीआई नम्बर की जाँच की तब यूपीआई किसी पान दुकान चलाने वाले व्यक्ति का निकला और उसने जांच टीम को बताया कि उसे कोई कोशले आरक्षक है जो उसके यूपीआई में पैसा भिजवाता है। फिर कोशले और उसके साथी आकर पैसा ले जाते है। लेकिन अभी तक इस मामले में किसी आरक्षक पर कार्रवाई नही हुई है। अवैध वसूली के इस मामले में निश्चित ही कार्रवाई होनी चाहिए जिससे पुलिस की छवि घुमिल न हो।
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