● 26 दिनों से लटका है जांच: तीन आरक्षकों के द्वारा यूपीआई से रिश्वत लेने के मामले में जांच कर रही सीएसपी खापर्डे
जांजगीर। हमें चिंता किस बात की हमारे साथ सिस्टम है, और हम सिस्टम का हिस्सा हैं।
यह कहना है उन तीन आरक्षकों का जिनपर ऑनलाइन रिश्वत मामले में 26 दिन बाद भी कार्रवाई नही हो पाई है।
तीनों आरक्षक अब भी बेख़ौफ़ ड्यूटी कर रहे हैं, निःसन्देह इन्हें सिस्टम का भरपूर सपोर्ट मिल रहा है।
रायगढ़ में अवैध वसूली के ऐसे ही मामले में हुई कार्रवाई, आरक्षक निलंबित, लेकिन जांजगीर में निभाई जा रही जांच की औपचारिकता
रायगढ़ कोतवाली में पदस्थ आरक्षक लोमस राजपूत ने चोरी के केस की धमकी देकर 50 हजार घुस मांगा था ,जिसपर रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल ने तत्काल आरक्षक को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिये हैं। लेकिन जांजगीर में 26 दिनों से सिर्फ जांच चल रहा है। कार्रवाई अभी तक नही हुआ है।
पीड़ित युवक के घर चमकाने-डराने पहुंचा, CSP का रीडर निराला
22 जनवरी गुरुवार को सीएसपी का रीडर विजय निराला जांच के नाम पर पीड़ित युवक के घर पहुंचा। तब पीड़ित युवक काम करने बाहर गया था। प्रधान आरक्षक निराला ने युवक के माता पिता को कहा..आपका बेटा दारू पीता है क्या, दारू पीते आरक्षकों ने पकड़ा था। छोड़ने के लिए 2500 रुपये आरक्षकों को दिए थे, वापस हो गया है, अब सीएसपी ऑफिस आकर बयान दे दे। परिवार से कहा आप बता देना उनको दारू पीते पकड़े गए थे, बयान नही दिया तो कार्रवाई होगी।
क्या पीड़ित युवकों को घर जाकर शराबी कहने वाला विजय निराला रिश्वत लेने वाले आरक्षकों को उनके घर जाकर घूसखोर कहेगा?
सीएसपी ऑफिस का रीडर प्रधान आरक्षक विजय निराला जब पीड़ित युवक के घर पहुंचकर आपका बेटा शराब पीता है कह सकता है। तो क्या निराला आरक्षकों के घर जाकर उन्हें घूसखोर कहेंगें?
किसी भी मामले में पुलिस के द्वारा सूचना देने या पूछताछ करते समय पीड़ित को हमारे किस तरह के व्यवहार की आवश्यकता है । यह सोचना समझना पड़ता है। लेकिन उक्त रीडर द्वारा पूछताछ और जांच से ज्यादा बेटा दारू पीता है बताना और बयान न देने पर कार्रवाई होगा करके बताना ज्यादा जरूरी लगा।
आम आदमी पर तत्काल कार्रवाई, फिर पुलिस आरक्षकों पर कार्रवाई में इतना विलंब क्यों?
आपको बता दें..अन्य कोई सामान्य आरोपी यदि ऐसा साइबर फ्रॉड से जुड़ा अपराध करता है, तो पुलिस साइबर के जरिए जांच कर उसे तत्काल पता लगा लेती है, फिर धोखाधड़ी और साइबर फ्राड की कार्रवाई होती है। लेकिन 26 दिनों बाद भी जांच और कार्रवाई नही होना बहुत सारे सवालों को जन्म दे रहा है।
आखिर आरक्षकों का संरक्षक कौन?
आखिर कौन तीन आरक्षकों को बचाना चाह रहा है, किसकी कृपा दृष्टि के बदौलत ये आरक्षक बेखौफ होकर ऐसे घटना को अंजाम दे रहे हैं। निश्चित ही कोई है जो कह रहा कि करो- करो सब मैनेज करने के लिए मैं हूँ न।
सवाल इसलिए भी उठाना लाजमी है क्योंकि बिना आंतरिक स्पोर्ट के दिनदहाड़े अवैध वसूली , फिर जांच का 26 दिनों से लटकना कोई संयोग या जाँच की परिस्थिति नही है।
हो सकता है ये बचाव लॉबी के नमस्कार का चमत्कार हो
बचाओ लॉबी हुई एक्टिव
घटना के बाद मामला janjgirjunction.com में प्रकाशित हुआ, जिसके बाद “बचाओ लॉबी” एक्टिव हो गई है। विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि यह “बचाओ लॉबी” तीन आरक्षकों को बचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहा है, उन्हें पाक-साफ साबित करने एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।
पहले ये लॉबी युवकों को और खबर को रोकने की कोशिश में थी , ताकि मामला उच्चधिकारियों तक न पहुंचे ,ताकि जांच न हो। और जब जांच शुरू हुआ तो लम्बे समय तक अटका रखने में ये बचाव लॉबी सफल हो गई है। इतना ही नहीं ये लॉबी आरक्षकों को आश्वस्त कर चुकी है, कि हमने सब मैनेज कर लिया है चिंता मत करो तुमपर कोई कार्रवाई नही होगी।
एसपी ने कहा..
जब janjgirjunction.com ने सीएसपी के रीडर द्वारा तिलई के युवक को चमकाने डराने की जानकारी एसपी को दी , तो एसपी ने कहा कि यदि रीडर विजय निराला ऐसा कर रहा है तो जाँच प्रभावित होगी। हम इस जांच से निराला को हटा देँगे। रिश्वत मामले में हमारे द्वारा जांच भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा ( विजय कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा )
पीड़ित युवक के परिवार ने रीडर निराला के पूछताछ के तरीके पर आपत्ति जताई है
पीड़ित युवक के परिवार ने बताया कि गुरुवार को जांजगीर से कोई पुलिस वाला आया था, तब बेटा काम करने बाहर गया था। घर पहुंचते ही निराला ने पुछा आपका बेटा कहा है, दारु पीता है पुलिस वालों ने पकड़ा था, तो उन्हें 2500 रुपये दिया था लेकिन अब पैसा वापस हो गया है।
अब बयान देना पड़ेगा तीनो को। दारू पी रहे थे न उस दिन, कार्रवाई तो इन पर भी हो सकती है। इससे अच्छा है कि बयान दे दें।
घर के सदस्य से नम्बर लेकर पीड़ित युवक से विजय निराला ने फोन पर भी बात किया, और बयान और पैसा वापसी वाले बात को दोहराया ।
उसने अपना नाम प्रधान आरक्षक विजय निराला बताया कहा कि मैं सीएसपी ऑफिस में रीडर हूं, वहीं से आया हूँ, सीएसपी योगिता बाली खापर्डे मैडम इस मामले में जांच कर रही हैं, उन्होंने मुझे यहाँ भेजा है।
हालांकि किसी पीड़ित युवक के घर जाकर परिवार से बोलना की दारू पीता है, पुलिस पकडी थी,कार्रवाई होगी, पैसा वापस हुआ, बयान दें दें। ये सब बोलना उचित नहीं है। इस बात पर घर वालों ने भी आपत्ति जताई है, और पूछताछ के इस तरीके को अनुचित और दबाव पूर्वक बताया है।
क्या सच में निष्पक्ष हो रही जांच?
यह सवाल इसलिए किया जा रहा क्योंकि, 26 दिनों में अपने ही विभाग के तीन आरक्षकों तक जांच अधिकारी नहीं पहुंच पाई हैं । लेकिन उल्टा 12 किलोमीटर दूर पीड़ित युवक तक पहुंच गई, पीड़ित कहा जायेगा आपको मिल ही जायेगा, पहले जांच टीम अवैध वसूली करने वालों को खोजे ।
आपको बता दें जांच अधिकारी के पास डिजिटल साक्ष्य है, इसके बावजूद यूपीआई नम्बर से जांच अधिकारी शहर में ही मौजूद रिस्पांस टीम के आरक्षकों तक नही पहुंच पाई हैं। और पीड़ित युवकों के पास 12 किलोमीटर दूर जांच अधिकारी का रीडर निराला जाँच अधिकारी के आदेश पर पहुंच गया।
किसी जांच के लिए 26 दिन बहुत समय होता है, जांजगीर पुलिस ने ही अन्य मामलों में हप्ते भर में साइबर से जुड़े मामलों को सुलझाया है। लेकिन ये मामला खुद पुलिस विभाग के तीन आरक्षकों के रिश्वतखोरी का है। शायद इसलिए इतना विलम्ब हो रहा है।
अब Janjgirjunction.com से जानिए मामले के वास्तविक पहलुओं के बारे में
हमने इस मामले को बारीकी से जानने के लिए वास्तविक पहलुओं के बारे में पता किया। तब पता चला कि रिश्वत लेने वाले तीनों आरक्षक जांजगीर रिस्पांस टीम से है।
● पहला आरक्षक कोशले है जिसने युवकों को अपने मोबाइल से यूपीआई आईडी दिखाकर 2500 ट्रांसफर कराया।
● दूसरा आरक्षक राठौर है जिसने तीनो युवकों को पैसा न देने तक रोके रखा और अवैध वसूली के लिए डराते हुए कोशले के हां में हां मिलाता रहा।
● तीसरा आरक्षक जाटवर है जिसने तीनों युवकों को जबतक पैसा नहीं मिला , तबतक मोबाइल और चाबी को नही दिया।
पीड़ित युवको ने बताया कि इन तीनों आरक्षकों ने पैसा लेने कानूनी कार्रवाई जेल भेजने के बारे में बताकर धमकाया और डराया ।
साइबर ने किया है जांच
यूपीआई से रिश्वत के मामले में एसपी के कहने पर साइबर प्रभारी पाठक ने इसमे जांच-पड़ताल किया, जांच में जिस यूपीआई को आरक्षक कोशले ने पैसा डालने के लिए दिया था। जांच में वह किसी राठौर पान दुकान निकला है। पूछताछ में भी पान दुकान संचालक ने कोशले का नाम लिया है। उसने बताया कि यह 2500 कोशले ने मेरे यूपीआई पर ट्रांसफर कराया है।
पान दुकान वाले के खाते के सभी ट्रांजेक्शन कि हो जाँच, और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं
दूसरे के यूपीआई में आरक्षक के रिश्वत लेने के इस शातिर और हाईटेक तरीके ने संकेत दिया है कि क्या रिश्वत के लिए विभाग के अन्य लोग भी दूसरे यूपीआई का सहारा ले रहे हैं।
पान दुकान के यूपीआई ट्रांजेक्शन की जांच इसलिए भी जरूरी है कि क्या केवल कोशले ने पान दुकान को रिश्वत का कलेक्शन सेंटर बनाया है कि अन्य व्यक्ति के भी रिश्वत के पैसे यही आकर कलेक्ट होते हैं। यह निश्चित ही जांच का विषय है।
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