- दुर्ग में सुबह 8 बजे से खुलेंगे स्कूल: हायर सेकेंडरी की कक्षाएं दोपहर 12 बजे से
- बस्तर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है
छत्तीसगढ़ | कड़ाके की ठंड के बीच दुर्ग जिले में स्कूल के टाइम में बदलाव किया गया है। प्राइमरी स्कूल में पहली पाली सुबह 8 बजे से शुरू होंगी। वहीं हायर सेकेंडरी की दूसरी पाली दोपहर 12 बजे लगेंगी। नई टाइमिंग तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और यह 15 जनवरी तक प्रभावी रहेगी। हालांकि मौसम विभाग से मुताबिक मध्य और उत्तरी हिस्से के कुछ इलाकों में अगले तीन दिनों में 2-3 डिग्री तक तापमान बढ़ सकता है। यानी ठंड से कुछ राहत लोगों को मिल सकती है। ठंड बढ़ने से स्किन रिलेटेड समस्या दिसंबर में कुछ बढ़ी हैं। मेकाहारा में हर दिन औसतन 290-300 मरीज इन दिनों पहुंच रहे हैं। ज्यादातर को ड्राई स्किन, एक्जिमा और सोरायसिस की शिकायत है। ठंड में ये आम है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया तो खतरा बढ़ सकता है। 7 शहरों में तापमान 10°C से नीचे पहुंच गया है, जिनमें मैनपाट, अंबिकापुर, पेंड्रा और जगदलपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव शामिल हैं। मैनपाट में रात का पारा 4°C से नीचे चला गया और वहां ओस की बूंदें जमकर बर्फ में बदल गई हैं।
कलेक्टर ने शनिवार (13 दिसंबर) से जिले के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों की टाइमिंग बदलने का आदेश जारी कर दिया है।
अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 5.3°C,
पेंड्रा में 8.6°C और जगदलपुर में 8.2°C, दु
र्ग में 8.2 डिग्री और राजनांदगांव में 9.0 डिग्री दर्ज किया गया
पिछले 24 घंटे की बात करें तो सबसे अधिक तापमान 29.5°C राजनांदगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.3°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।
दो दिन पहले अंबिकापुर में खुले में सोए एक व्यक्ति की ठंड से मौत भी हो गई थी। मौसम विभाग ने आज भी कई शहरों में शीतलहर चलने का अलर्ट जारी किया है।
आदेश….

चलेगी शीतलहर
प्रदेश के कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, रायगढ़, गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बेमेतरा, रायपुर, दुर्ग, बालोद और कोरबा में एक दो पॉकेट में शीतलहर चलने की संभावना है।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि शीतलहर के दौरान, केवल आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।
मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है। वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।
सतर्क रहना जरूरी
बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…
⇒ शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
⇒ स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
⇒ घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
पानी जमा न होने दें
कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।
शरीर को ढककर रखें
> खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
> बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
समय पर जांच और इलाज कराएं
> यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
मलेरिया फैलने का आधार
> तापमान 33-39°C (दिन में)
> तापमान 14-19°C (रात में)
ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।
2 तरह के मलेरिया का खतरा
>प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
>प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं
गर्म पानी से भाप लेना फायदेमंद
अगर बंद नाक की समस्या है तो गर्म पानी से भाप लेना बेहद फायदेमंद है। भाप नाक के जरिए हमारे शरीर में जाकर गर्मी पैदा करती है। नाक में जमा म्यूकस भाप की गर्मी से ढीला हो जाता है, जिससे बंद नाक की समस्या दूर हो सकती है। इसके लिए एक बाउल में गर्म पानी लें। फिर सिर को एक कॉटन टॉवेल से ओढ़ लें। इसके बाद बर्तन का ढक्कन हटाकर 5 से 10 मिनट तक भाप लें।





