वांगचुक को एनएसए के तहत गिरफ्तार कर भेजा गया है जेल
सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई टल गई। सुनवाई अब 15 अक्टूबर को होगी। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने समय की कमी के चलते मामले की सुनवाई टाल दी।
इसके पहले वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से सुनवाई टालने की मांग की थी।
गीतांजलि ने 2 अक्टूबर को आर्टिकल 32 के तहत कोर्ट में हेबियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने पति की NSA के तहत गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।
दरअसल, वांगचुक 19 दिनों से जोधपुर की जेल में हैं। उन्हें 24 सितंबर को लेह हिंसा भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। हिंसा में 4 लोग मारे गए थे।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र को नोटिस भेजा था
इससे पहले 6 अगस्त की सुनवाई में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर जवाब मांगा था।
वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल ने दलील में कहा था- सोनम वांगचुक को जिन कारणों से हिरासत में लिया गया, उसकी कॉपी परिवार को नहीं सौंपी गई है।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था- हिरासत के कारण हिरासत में लिए गए व्यक्ति (वांगचुक) को पहले ही दिए जा चुके हैं। इसकी कॉपी वांगचुक की पत्नी को देने पर विचार किया जाएगा।
अंगमो ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और गृह मंत्री को लिखा है पत्र
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह, लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और को पत्र लिखा था। अंगमो का आरोप है कि वांगचुक को शांत कराने के लिए पिछले महीने से विच हंट शुरू किया गया है। अंगमो ने कहा था कि वांगचुक कभी भी किसी के लिए खतरा नहीं हो सकते, अपने राष्ट्र की तो बात ही छोड़ दें।
वांगचुक की मांग– लेह हिंसा की न्यायिक जांच हो
सोनम वांगचुक ने लेह हिंसा के दौरान हुई 4 लोगों की मौत की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। वांगचुक ने अपने पत्र में लिखा है
जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों और गिरफ्तार लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं। 4 लोगों की मौत की जांच एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग से होनी चाहिए, जब तक ऐसा नहीं होता, मैं जेल में ही रहूंगा।





